कुछ प्रेम कहानियाँ शुरू नहीं होतीं...
धीरे-धीरे दिल में उतरती हैं।
यह कहानी है आरव और अनन्या की — दो अजनबी, जो एक कॉलेज के गलियारे में मिले और अनजाने में एक-दूसरे की ज़िंदगी का हिस्सा बन गए। यह कोई फिल्मी प्रेम कहानी नहीं है। यह उन ख़ामोश लम्हों की कहानी है, जिनमें प्यार सबसे ज़्यादा बोलता है — एक अधूरे जवाब में, एक देर रात की कॉल में, बारिश में भीगी हुई एक मुस्कान में।
"पहला इश्क़, आख़िरी एहसास" उन सभी के लिए है जिन्होंने कभी किसी को बिना कहे चाहा है — और आज भी उस एहसास को दिल के किसी कोने में सहेजे बैठे हैं।

"कुछ लोग ज़िंदगी बदलने नहीं आते...
बस उसे खूबसूरत बना देते हैं।"

"मोहब्बत शायद शब्द नहीं...
एक एहसास है।"
हर बिंदु पर क्लिक करें और उस पल को फिर से जिएँ।
जहाँ से सब कुछ शुरू हुआ, बिना किसी को एहसास हुए।

दो अजनबी, अब हर बात में एक-दूसरे को ढूँढने लगे।

जहाँ नींद कम थी, पर सुकून सबसे ज़्यादा।

जब बूँदों के बीच पहली बार दिल की धड़कन तेज़ हुई।

हर मुलाक़ात, एक नई कहानी छोड़ जाती थी।

जो कहा नहीं जा सका, वो काग़ज़ पर उतर आया।

जब शब्द कम पड़ गए, और दूरियाँ बढ़ गईं।

जब दिल ने आख़िर हिम्मत जुटा ही ली।

जहाँ कहानी ख़त्म नहीं होती, बस शुरू होती है।

लिफ़ाफ़े पर क्लिक करें और मुहर टूटने दें।
पूरी किताब में 50 अध्याय हैं · अनुमानित पढ़ने का समय
इस प्रेम कहानी की पहली झलक — शब्दों से परे एक एहसास।
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